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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 43
एकैकमङ्गुलीभिः स्याद्रेखाभिर्द्दशधा फलम् । मणिभिः शतसाहस्रं माणिक्याऽनन्तमुच्यते ॥
अंगुलि से जप की गणना का फल एक गुना, रेखाएँ खींच कर गणना करने का फल दस गुना, मणियों से गणना करने का फल सौ हजार गुना और माणिक्य से गणना करने का अनन्त फल कहा गया है।
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