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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 41
अक्षमाला द्विया प्रोक्ता कल्पिताऽकल्पितेति च । कल्पिता मणिभिः क्लृप्ता मातृका स्थादकल्पिता ॥
अक्षमाला दो प्रकार कही है - १. कल्पिता और २. अकल्पिता। कल्पिता 'मणियों' से बनती, है और अकल्पिता 'मातृकाओं' से बनती है।
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