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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 40
अकृत्वा न्यासजालं यो मूढात्मा प्रजपेन्मनुम् । वाध्यते सर्वविघ्नैश्च व्याधैर्मृगशिशुर्यथा ॥
न्यासजाल को किये बिना जो मूर्ख मन्त्र का जप करता है, उसे सभी विघ्न बाधा पहुंचाते हैं जैसे बाध मृग के बच्चों को बाधित करता है।
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