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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 35
मानसं वाचिकं पापं कायिकं वापि यत् कृतम् । तत् सर्वं निईहेच्छीघ्रं प्राणायामत्रयं शिवे ॥
उक्त तीनों 'प्राणायाम' मानस, वाचिक और कायिक - सभी पापों को तुरन्त भस्म कर देते हैं।
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