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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 34
तपांसि तीर्थयात्राद्या मखदानव्रतादयः । प्राणायामस्य तस्यैते कलां नार्हन्ति षोडशीम् ॥
तप, तीर्थयात्रा, यज्ञ, दान, व्रत आदि 'प्राणायाम' की १६ वीं कला के भी बराबर नहीं है।
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