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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 33
जपध्यानं विनाऽगर्भः सगर्भस्तद्विपर्ययात् । अगर्भाद् गर्भसंयुक्तः प्राणायामः शताधिकः ॥
जप और ध्यान से रहित प्राणायाम 'अगर्भ' होता है। 'अगर्भ' की अपेक्षा 'सगर्भ' प्राणायाम सौ गुना अधिक फलदायक है।
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