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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 31
षोडशावर्त्तयन् तारं पूरयेद् बाह्यमारुतम् । शनकैरिडया बद्ध्वा पूरकं परिकीर्त्तितम् ॥
सोलह बार 'तार' (ॐ) को जपता हुआ बाह्य मारुत (वायु) को इडा (बाँए नासिका) से भरे - यह 'पूरक' है।
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