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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 27
वंशाश्मधरणीदारुतृणपल्लवनिर्मितम् । वर्जयेदासनं धीमान् दारिद्र्यव्याधिदुःखदम् ॥
बांस, पत्थर, मिट्टी, लकड़ी, तृण और पत्तों से बने आसनों को बुद्धिमान साधक त्याग दे। ये आसन दरिद्रता, व्याधि और दुःख देते हैं ।
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