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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 23
प्लेच्छदुष्टमृगव्यालशङ्कातङ्कविवर्जितः । एकान्तपावने निन्दारहिते भक्तिसंयुते ॥ स्वदेशे धार्मिके देशे सुभिक्षे निरुपद्रवे । राजभक्तजनस्थाने निवसेत्तापसाश्रये ॥
म्लेच्छ, दुष्ट, पशु, सर्पादि की शङ्का और भीति से रहित, एकान्त, पवित्र, अनिन्दित, भक्तियुक्त, स्वदेश, धार्मिक देश, अन्नादि से सम्पत्र, उपद्रव हीन (विघ्नरहित), रमणीय और तपोवन में निवास करे।
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