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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 22
गृहे शतगुणं विद्याद् गोष्ठे लक्षगुणं भवेत् । कोटिर्देवालये पुण्यमनन्तं शिवसन्निधौ ॥
घर में सौगुना, गोष्ठ में लाख गुना, देवमन्दिर में करोड़ गुना और शिव के निकट जप करने का अनन्त फल होता है।
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