पुण्यक्षेत्र, नदीतट, गुफा, पर्वतशिखर, तीर्थस्थान, नदियों का सङ्गम, तपोवन, उद्यान, विल्वमूल, पर्वततट, देवमन्दिर, समुद्रतट और अपना घर मन्त्र साधकों के लिए ये साधना स्थान प्रशस्त कहे गए है अथवा साधक का जहाँ चित्त प्रसन्न हो, वहाँ निवास करना चाहिए।
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