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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 2
ईश्वर उवाच- शृणु देवि प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वं परिपृच्छसि । तस्य श्रवणमात्रेण मन्त्रतत्त्वं प्रकाशते ॥
ईश्वर ने कहा - हे देवि! सुनिए, जो आपने मुझसे पूछा है, उसे कहूँगा। उसके सुनने मात्र से मन्त्र का तत्त्व ज्ञात होता है।
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