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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 19
पुस्तके लिखितान्मन्त्रान् विलोक्य प्रजपन्ति ये । ब्रह्महत्यासमं तेषां पातकं व्याधिदुःखदम् ॥
पुस्तक में लिखे मन्त्रों को देखकर जो जपते हैं, उन्हें ब्रह्महत्या के समान दुःखदायी पाप लगता है।
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