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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 18
यदृच्छया श्रुतं मन्त्रं दृष्टेनापि छलेन च । पत्रे स्थितं वा चाध्याप्य तज्जपः स्यादनर्थकृत् ॥
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