यदृच्छया श्रुतं मन्त्रं दृष्टेनापि छलेन च ।
पत्रे स्थितं वा चाध्याप्य तज्जपः स्यादनर्थकृत् ॥
अचानक सुने या देखे हुए मन्त्र, या छल से प्राप्त मन्त्र, या किसी पन्ने पर लिखे मन्त्र का जप करने से हानि होती है।
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