अनेककोटिमन्त्राणि चित्ताकुलकराणि च ।
मन्त्रं गुरुकृपाप्राप्तमेकं स्यात् सर्वसिद्धिदम् ॥
अनेक कोटि मन्त्र चित्त को व्याकुल करने वाले हैं। गुरुकृपा से प्राप्त एक मन्त्र ही सभी सिद्धियों का देने वाला है।
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