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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 16
मातृकाजपमात्रेण मन्त्राणां कोटिकोटयः । जषिताः स्युर्न सन्देहो यतः सर्वं तदुद्भवम् ॥
मातृका के जप मात्र से कोटि मन्त्रों का जप हो जाता है क्योंकि सभी मन्त्र मातृका से ही उत्पन्न हुए हैं।
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