दीक्षापूर्व कुलेशानि पारम्पर्यक्रमागतम् ।
न्यायलब्धश्च यो मन्त्रः स च सिद्धो न संशयः ॥
हे कुलेशानि! परम्परा के क्रम से दीक्षापूर्वक विधिविधान पूर्वक जो मन्त्र मिलता है, वह सिद्ध होता है, इसमें सन्देहं नहीं।
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