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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 10
अन्नैश्चतुर्विधैर्देवि पदार्थैः षड्रसान्वितैः । सुभोजितेषु विप्रेषु सर्वं हि सफलं भवेत् ॥
चतुर्विध अन्न के पदार्थों से, जो छः रसों से युक्त हों, विप्रो को भोजन कराकर सन्तुष्ट करे, तो सभी कर्म सफल होते हैं।
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