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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 87
श्रीगुरुं गुरुपत्नीञ्च तत्पुत्रं शक्ति कौलिकान् । दीक्षितस्तोषयेद्देवि यथाविभवविस्तरम् ॥
दीक्षा पाकर शिष्य श्री गुरुदेव, गुरुपत्नी, गुरुपुत्र, शक्तियों और कौलिकों को हे देवि! यथाशक्ति सन्तुष्ट करे।
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