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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 76
अदीक्षिता ये कुर्वन्ति जपपूजादिकाः क्रियाः । न फलन्ति प्रिये तेषां शिलायामुप्तबीजवत् ॥
हे प्रिये! दीक्षाहीन व्यक्ति जप पूजादि जो क्रियाएँ करते हैं, पत्थर में बोये हुये बीज के समान वे जपादि क्रियाएँ फल नहीं देतीं।
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