दार्वश्मलौहमृद्रत्नजातिलिङ्गप्रतिष्ठितम् ।
यथोच्यते तथा शुद्धाः सर्ववर्णास्तु दीक्षिताः ॥
जिस प्रकार लिङ्गरूप में प्रतिष्ठित होने पर काष्ठ, पत्थर, लौह, मिट्टी, रत्न की जाति नहीं रह जाती, उसी प्रकार सभी वर्ण के मनुष्य दीक्षित होकर शुद्ध ही कहे जाते हैं।
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