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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 72
शिवलिङ्गे शिला बुद्धिं कुर्वन् यत् पापमश्नुते । दीक्षितश्चापि पूर्वत्वस्मृत्या तत् पापमाप्नुयात् ॥
शिवलिङ्ग को शिला समझने से जो पाप होता है, वही पाप दीक्षित को पूर्वावस्था का स्मरण करने से लगता है।
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