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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 64
मन्त्रौषधेर्यथा हन्याद्विषशक्तिं कुलेश्वरि । पशुपाशं तथा छिन्द्याद्दीक्षया मन्त्रवित् क्षणात् ॥
हे कुलेश्वरि! जैसे मन्त्र और औषधि द्वारा विष की शक्ति नष्ट की जाती है, वैसे ही दीक्षा द्वारा मन्त्रज्ञ पशुपाश को क्षण भर में काट देता है।
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