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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 61
दीक्षया मोक्षदीपेन चण्डालोऽपि विमुच्यते । आभ्यां विना कुलेशानि कौलिको नैव मुच्यते ॥
मोक्षदीप के समान दीक्षा द्वारा चाण्डाल भी मुक्त होता है। हे कुलेशानि! उक्त दोनों के बिना कौलिक की मुक्ति नहीं होती।
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