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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 59
दीक्षा च द्विविधा प्रोक्ता बाह्याभ्यन्तरभेदतः । क्रियादीक्षा भवे‌द्वाह्या वेधाख्याभ्यन्तरी मता ॥
दीक्षा दो प्रकार की कही गई है - १. बाह्य, २. आभ्यन्तर। क्रियादीक्षा बाह्य है और वेध आभ्यन्तरी कही गई है।
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