१-३. तीनों समय दन्तधावन, ४-६. तीनों समय पुष्पाञ्जलि, ७. शङ्खोदक से अभिषेक और ८. वेधन - इस प्रकार आठ क्रियायें हैं। फिर १. शङ्खाभिषेक, २. बोधन, ३. वेध, ४. पूर्णाभिषेक और ५. आचार्य - ये पाँच अवस्थायें कही गई हैं। केवल कुलाचार में तत्पर, गुरुभक्त, दृढ़ब्रती जो पूर्णाभिषेक से पवित्र है, वे इसी जन्म में मुक्त होते हैं।
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