हे देवि! 'मीन' लम्बिका (जिह्वा) है और 'कलश' मुख को कहा है। इस प्रकार पञ्चगव्यामृत से पूर्ण मुख द्वारा शिष्य का अभिषेक करे। हे पार्वति! यह सिद्धाभिषेक है और आचार्य के लिये भी वाञ्छनीय है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।