सजीवमीनयुक्तेन सुरया पूरितेन च । पश्चामृतैः सुसम्पूर्णशोन कलसेन वा । अभिषेकं ततः कुर्याद्बाले तत् कथितं प्रिये ॥
हे प्रिये! तब सजीव मीन से युक्त सुरा या पञ्चामृत से पूर्ण शङ्ख द्वारा या कलश के द्वारा बाह्य अभिषेक करें।
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