मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 54
कुलद्रव्यं मुखे पूर्व पञ्चगव्यामृतान्वितम् । अभिषिश्चेद् गुरुः शिष्यं गण्डूषाख्या समीरिता ॥
पञ्चगव्यामृत से युक्त कुलद्रव्य को मुख में भरकर गुरुदेव गण्डूष (कुल्ला) द्वारा शिष्य का अभिषेक करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें