इससे क्षण मात्र में ही शिष्य पापों से मुक्त होकर उसी समय परानन्दमय को प्राप्त होता है। हे कुलेश्वरि! हे देवि! यह मुक्तिप्रदा 'तीव्रदीक्षा' कही गई है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।