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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 48
एषा मुक्तिप्रदा प्रोक्ता तीव्रदीक्षा कुलेश्वरि ॥
इससे क्षण मात्र में ही शिष्य पापों से मुक्त होकर उसी समय परानन्दमय को प्राप्त होता है। हे कुलेश्वरि! हे देवि! यह मुक्तिप्रदा 'तीव्रदीक्षा' कही गई है।
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