'मनोदीक्षा' १. तीव्रा और २. तीव्रतरा दो प्रकार की है। हे प्रिये! शिष्य के शरीर में १. भुवन, २. तत्त्व, ३. कला, ४. वर्ण, ५. पद, ६. मन्त्र - इन छः अध्वानों का स्मरण करते हुए क्रमशः १. जानु, २. नाभि, ३. हृदय, ४. कण्ठ, ५. तालु और ६. मूर्द्धा में हे अम्बिके! गुरुपदिष्ट मार्ग से वेध करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।