अतः सम्प्रदाय आदि साधनों से सिद्धान्त को जान कर आन्तरिक उपदेश देने वाले को प्राप्त करे, अन्यथा मन्त्र निष्फल होते हैं। परम्परा के प्रवर्तक, मन्त्र और आगम के ज्ञाता और समयाचार के पालन करने वाले गुरु को ही देवता मानते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।