हे प्रिये! 'कलादीक्षा' तीन प्रकार की है, जिसे विधिवत् करे। १. पैरों के तलवे से लेकर घुटनों तक 'निवृत्ति', २. घुटनों से नाभि तक 'प्रतिष्ठा', ३. नाभि के कण्ठ तक 'विद्या', ४. कण्ठ से ललाट तक 'शान्ति', ५. ललाट से शिर तक 'शान्त्यतीता' - ये पाँच कलाएँ स्थित हैं। यही कलाएँ 'कलाव्याप्ति' नाम से जानी जाती है।
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