कुण्ड, मण्डप और कलश आदि से युक्त 'क्रियादीक्षा' आठ प्रकार की है, जिसे बाहापूजा विधि से गुरु को करना चाहिये। हे देवेशि! पूर्वोक्त विधि का देह शुद्धि के लिए आचरण करना चाहिए। 'वर्णदीक्षा' ४२, ५० या ६२ अक्षरों के (न्यास के) भेद से तीन प्रकार की है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।