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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 33
शक्तिपातानुसारेण शिष्योऽनुग्रहमर्हति । यत्र शक्तिर्न पतति तत्र सिद्धिर्न जायते ॥
शक्तिपात की मात्रा के अनुसार शिष्य पर अनुग्रह करे। जिस पर शक्तिपात नहीं होता, उसे सिद्धि नहीं मिलती।
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