हे देवि! आदि (आरम्भ), मध्य और अवसान (अन्त) में शक्ति-निपात के योग्य तीन प्रकार के शिष्य क्रमशः १. अधम, २. मध्यम और ३. श्रेष्ठ कहे गये हैं।
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