मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 2
ईश्वर उवाच- शृणु देवि प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वं परिपृच्छसि । तस्य श्रवणमात्रेण चित्तशुद्धिः प्रजायते ॥
ईश्वर ने कहा - हे देवि! सुनिए, जो आपने मुझसे पूछा है, उसे मैं बताऊँगा, जिसके सुनने मात्र से चित्त की शुद्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें