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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 18
उत्तमांश्चाधमे कुर्यान्नीचानुत्तमकर्मणि । प्राणद्रव्यप्रणामाद्यैरादेशैश्च स्वयं समैः ॥
प्राण (जीवन), द्रव्य (धन) एवं प्रणामादि आदेशों द्वारा निम्न कर्मों में उत्तम और उत्तम कर्मों में निम्न क्रियाएँ गुरु स्वयं करे।
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