ज्ञानेन क्रियया वापि गुरु शिष्यं परीक्षयेत् ।
संवत्सरं तदर्द्ध वा तदई वा प्रयत्नतः ॥
शिष्य के ज्ञान और क्रिया दोनों को परीक्षा एक वर्ष तक या छः मास तक या तीन मास तक गुरु यत्न करके ले।
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