धनेच्छाभयलोभाद्यैरयोग्यं यदि दीक्षयेत् ।
देवताशापमाप्नोति कृतञ्च निष्फलं भवेत् ॥
धन की इच्छा, भय एवं लोभादि से यदि अयोग्य को दीक्षा दी जाती है, तो वह निष्फल होती है और देवता का शाप मिलता है।
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