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कुलार्णव • अध्याय 14 • श्लोक 13
अनहें मन्त्रविज्ञानं न तिष्ठति कदाचन । तस्मात् परीक्ष्य कर्त्तव्यमन्यथा निष्फलं भवेत् ॥
अयोग्य के पास मन्त्र विज्ञान कभी नहीं ठहरता, अतः परीक्षा लेकर ही उपदेश करे, अन्यथा निष्फल होता है।
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