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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 75
तत्त्वहीनं गुरुं लब्ध्वा केवलं भव तत्परः । इहामुत्र फलं किञ्चित् स नरो नाप्नुयात् प्रिये ॥
केवल संसार में लवलीन तत्त्वहीन गुरु को पाकर, हे प्रिये! मनुष्य इस लोक में या परलोक में कुछ भी फल नहीं पाता।
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