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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 74
अभिज्ञश्चोद्धरेन्मूर्ख न मूखों मूर्खमुद्धरेत् । शिलां सन्तारयेन्नौर्हि किं शिला तारयेच्छिलाम् ॥
विज्ञ ही मूर्ख का उद्धार करता है; मूर्ख मूर्ख का उद्धार नहीं करता। नौका ही शिला को पार लगाती है; शिला शिला को पार नहीं लगाती।
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