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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 73
विद्धस्तु वेधयेद्देवि नाविन्द्धो वेधको भवेत् । मुक्तस्तु मोच्चयेद् बद्धं न मुक्तो मोचकः कथम् ॥
हे देवि! विद्ध ही वेधन करता है, अविद्ध वेधक नहीं होता। मुक्त ही बद्ध को छुड़ाता है। जो मुक्त नहीं है, वह मोचक कैसे होगा?
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