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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 70
सर्वलक्षणहीनोऽपि तत्त्वज्ञानी गुरुः स्मृतः । तस्मात्तत्त्वविदेवेह मुक्तो मोचक एव च ॥
सर्व लक्षणों से हीन होता हुआ भी तत्त्व ज्ञानी ही 'गुरु' माना गया है क्योंकि तत्त्व ज्ञाता ही इस संसार में मुक्ति दाता है।
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