गुरु के ध्यान, स्तुति, कथा और देवता की पूजा बन्दना में उत्सुक, गुरु दैवत में समान भक्ति रखने वाले, कुल स्त्री पूजक, नित्य गुरु के समीप रहने बाले, गुरु को सन्तुष्ट करने वाले, मन, वचन, शरीर से नित्य सेवा में तत्पर, गुरु आज्ञा का पालन करने वाले, गुरु कीर्ति को फैलाने वाले, गुरु वाक्य को प्रमाण मानने वाले, गुरुसेवा में तत्पर, मनोनुकूल, सेवक के सामान गुरु का कार्य करने वाले, गुरु के समक्ष जाति, मान एवं धन में गर्व न करने वाले, गुरुद्रव्य से निरपेक्ष, गुरु प्रसाद के अभिलाषी, कुल धर्म कथा और योग-योगिनी कौलिकों को चाहने वाले, कुलपूजा में लगे हुए और कुल द्रव्य का गोपन करने वाले, जप व ध्यानादि में तत्पर, मोक्षमार्ग के अभिलाषी, कुलशास्त्र को मानने वाले और पशुशास्त्र से विमुख आदि- इस प्रकार के लक्षणों से युक्त व्यक्ति को शिष्य बनाए।
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