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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 68
स्वयं वेद्ये परे तत्त्वे स्वात्मानं वेत्ति निश्चलः । आत्मनोऽनुग्रहो नास्ति परस्यानुग्रहः कथम् ॥
परम तत्त्व को स्वयं जानने पर ही निश्चल आत्म ज्ञान होता है। जिसकी आत्मा पर अनुग्रह नहीं हुआ है, वह दूसरे पर अनुग्रह कैसे कर सकता है?
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