सर्वलक्षणसम्पन्नो वेदशास्त्रविधानवित् ।
सर्वोपायविधानज्ञस्तत्त्वज्ञानी गुरुः स हि ॥
सर्वलक्षणसम्पन्न, वेदशास्त्रविधि एवं विधान को जानने वाले और सभी उपायों के ज्ञाता, तत्त्वज्ञानी ही गुरु है।
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