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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 65
दीपदर्शनमात्रेण प्रणश्यति तमो यथा । सद्‌गुरोर्दर्शनाद्देवि तथाऽज्ञानं विनश्यति ॥
दीप के दर्शनमात्र से जैसे अन्धकार का नाश हो जाता है, हे देवि! वैसे ही सद्‌गुरु के दर्शन मात्र से अज्ञान नष्ट हो जाता है।
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