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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 62
यथा वह्निसमीपस्थं नवनीतं विलीयते । तथा पापं विलीयते सदाचार्य समीपतः ॥
जैसे अग्नि के पास रखा मक्खन पिघल कर विलीन हो जाता है, वैसे ही सद्‌गुरु के पास पाप विलीन हो जाता है।
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